चलती कार में मेरी मस्त चुदाई

डियर फ्रेंडस,
अर्थ, काम और मोक्ष जीवन के अभिन्न अंग है तो मुझे काम ( सेक्स ) में गहरी रुचि है और पता नहीं हर दिन अलग तरीके से मजा लेना पसंद है साथ ही बेड पार्टनर यदि पति के अलावा कोई और हो तो और अच्छा चूंकि हर दिन वहीं भोजन खाने से भूख पेट की घटती है तो स्वाद बदलकर ही भूख बरकरार रखा जा सकता है और पिछले छह वर्ष में ही मैंने अपने तन की आग को समझ पाई हूं, जबतक मेरा छोटा भाई राहुल मुझे हाथ नहीं लगाया था तब तक मैं सिर्फ पोर्न मूवी देखती तो चूत को उंगली से कुरेदती थी लेकिन भाई का लंड चख कर मैंने बहुत कुछ सीखा, शुरू में थोड़ी झिझक और शर्मिंदगी तो महसूस हुई लेकिन ज्यों ज्यों दोनों एक दूसरे के तन की आग बुझाने लगे तो शर्म और झिझक दूर होती चली गई और मेरी शादी डैड ने महज २१ साल की उम्र में ही करा दी तो मैं अपने पति के साथ शादीशुदा जीवन जीने लगी लेकिन साल डेढ़ साल तक ही अपने तन को गैरों की बाहों से दूर रख सकी तो उनके सीनियर गुरदीप फिर उनके दोस्त से मेरी मुलाकात हुई और मैं अब इधर उधर मुंह मारने लगी। शादी के पांच साल बीत चुके हैं और अभी तक कोई बच्चा पैदा नहीं की ताकि आराम से जवानी के मजे ले सकूं, फिलहाल मैं एक शादी में ससुराल आईं हुई हूं तो मेरे पति शादी के अगले दिन ही वापस अंबाला चले गए और मैं अपने देवर, सासू मां साथ ही ससुर जी के संग आज शाम इटावा शहर जा रही हूं चूंकि मेरे ससुर जी ने वहीं घर बनाया है तो सासू मां की सेवा करने के लिए ही मुझे यहां रुकना पड़ा है और शाम के पांच बजे हमलोग दो गाड़ी में सवार होकर इटावा के लिए निकल पड़े, तकरीबन ६५-७० किलोमीटर की दूरी तो मैं स्विफ्ट डिजायर कार में देवर जी के साथ बैठी हुई थी और दूसरी गाड़ी में सासू जी और ससुर थे। मेरे देवर जी मेरे से थोड़ी दूरी बनाए बैठे रहे तो सड़क की स्थिति अच्छी नहीं थी और कुछ पल बाद ड्राइवर ने बीच का पर्दा खींच कर हम दोनों को एक अच्छा मौका दिया तो विवेक रुकने वाले में से कहां था, धीरे धीरे मेरी ओर खिसका तो मैं जानबूझकर खिड़की की ओर बढ़ने लगी और फिर वो मेरे कंधे पर हाथ रख मेरा चेहरा अपनी ओर किया ” क्या जान बहुत भाव खा रही हो
( मैं उसके आंखों से आंखें मिलाते हुए बोली ) अब क्या कार का गेट खोल बाहर चली जाऊं बोलो ” तो विवेक मेरे ओंठ पर चुम्बन देने लगा साथ ही मेरे कंधे पर ब्लाऊज से लगी साड़ी के पिन को खोल साड़ी का पल्लू नीचे किया, मेरे उफान लेती चूचियों को पकड़ दबाता हुआ मेरे ओंठ को ही मुंह में लिए चूसने लगा तो कहिए कार में ही सेक्स शुरू हुआ फिर क्या था, मैं अपने हाथ विवेक के पीठ पर लगाई और ज्योंहि वो मेरे ओंठ मुंह से निकाला मैं उसके छाती को सहलाते हुए शर्ट के बटन खोलने लगी।
विवेक जल्दबाजी में था तो मेरे बूब्स पकड़े दबाने लगा और मैं उसके जींस के ज़िप को खोलने लगी तो वो खुद ही अपना जींस सहित चढ्ढी उतार दिया, अब मेरी आंखों के सामने उसका लंड था जिसे पकड़ बोली ” तेरा औजार तो हमेशा खड़ा ही रहता है
( वो मेरे घुटनों के पास हाथ लगाए साड़ी और पेटीकोट को ऊपर करने लगा ) क्या है कि तेरी जैसी माल जिसके साथ हो उसका तो खड़ा ही रहेगा ” और मैं थोड़ा चूतड उपर किए पेटीकोट सहित साड़ी को कमर तक की तो मेरा सर अब खिड़की से सटा हुआ था तो दोनों जांघों को फैलाकर मैं चूत दिखा रही थी, मेरे जांघों के बीच चेहरा झुकाए विवेक बुर को चूमने लगा तो कार के पिछले सीट पर दोनों कामुक हो रहे थे, मेरे मोटे फांकों को चूमने लगा साथ ही मेरी चूची ब्लाऊज पर से पकड़ पुचकार रहा था तो मैं दोनों जांघ उपर उठाई और एक पैर तो सीट के उपरी हिस्से पर रखी और दूसरे को विवेक पकड़ कर चूत में जीभ घुसाए चाटने लगा ” उई सी इस आह उह प्लीज़ जल्दी करो मेरी चूत को तेरा लंड चाहिए ” वो अब चेहरा उपर किया फिर बुर में दो उंगली घुसाए रगड़ने लगा तो मैं सर को खिड़की पर रख अर्ध रूप से बैठी हुई थी। विवेक की उंगली बुर को गर्म कर रही थी तो मैं उसके हाथ पकड़े उंगली को चूत से निकाल दी, फिर मैं सीधे बैठ उसको अर्ध रूप से लेटने को बोली तो विवेक अपना जींस और चढ्ढी पैर से निकाल आराम से बैठ गया टीम, फिर मैं उसके लंड पकड़े चूमने लगी साथ ही मेरी उंगली उसके झांट में घूम रही थी और गाड़ी की स्लो स्पीड की वजह से मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रहा था। दीपा मुंह खोल देवर के लंड को अंदर ले ली फिर चूसते हुए मस्त थी तो विवेक मेरे ब्लाऊज पर से ही चूची पकड़ दबाने लगा, वैसे भी मेरी चूची ब्लाऊज से आधी निकली हुई थी तो मेरे मुंह में उसका लंड अकड़ रहा था और अब मैं मुंह का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो देवर मेरे पीठ पर हाथ फेरते हुए ब्लाऊज की डोरी खोल दिया। दीपा की दोनों चूचियां सीने से लटक रही थी तो मुखमैथुन का आनंद लेते हुए चूची मस्लवा रही थी और फिर विवेक मुझे बोला ” ओह उह भाभी जरा मुंह से निकाल दीजिए ” तो मैं उसके थूक से भिंगे लंड निकाल जीभ से चाटते हुए उससे नजर मिलाने लगी और विवेक का लंड पूरी तरह से अकड़ चुका था…. to be continued.

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Linga11

I am here to share incidence which happened / not happened in my life.I love to write but have strong love for writing incest or porn stories.I think you readers will enjoy my stories reading in a free time and while thinking about its situation.I know your sexual organs will than be in fire.
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